सेवा क्षेत्र में निवेश के लिए भारत में असीमित अवसर

‘ग्लोबल एक्जिबिशन ऑन सर्विसेस’ सम्मेलन में लोगों की राय

मुंबई: वैश्विक स्तर पर सर्विस उद्योगों के निवेश के लिए भारत में खुला वातावरण है। सूचना एवं तकनीक क्षेत्र में विश्व स्तर के अग्रणी देशों में भारत का भी समावेश है। बैंकिंग, बीमा आदि वित्तीय सेवाओं, मनोरंजन उद्योग, आतिथ्य सेवा, शिक्षा, अचल संपत्ति विकास सेवाओं में विदेशी निवेश के अपार अवसर हैं। यैसा विचार ‘ग्लोबल एक्जिबिशन ऑन सर्विसेस (जीईएस) 2018’ सेवा क्षेत्र की विश्व प्रदर्शनी के आज पहले दिन आयोजित ‘द इंडिया ऑपरॉर्च्युनिटी-फोर्जिंग ग्लोबल पार्टनरशिप फॉर ट्रेड एण्ड इन्वेस्टमेंट इन सर्विसेस’ इस अंतर्राष्टीय सम्मेलन में व्यक्त किया गया।

भारत सरकार के वाणिज्य विभाग और महाराष्ट्र सरकार के साझे में चार दिवसीय विश्व स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन आज हुआ। इस सम्मेलन में कई देशों के विश्वस्तर के सेवा उद्योगों सहित, भारतीय सेवा उद्योग, केंद्र सरकार और राज्य सरकार के उपक्रमों को भी शामिल किया गया है। सर्विस सेक्टर के अवसरों की जानकारी देने के लिए विभिन्न संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।

आज पहले दिन की संगोष्ठी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक पी. के. गुप्ता, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक डेविड रस्किन्हा, विश्व आर्थिक मंच एलएलसी, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम एलएलसी, अमेरिका की कार्यकारी समिति की सदस्य ज़ारा इंगिलिझियन, जेम्स एज्युकेशन, दुबई के चीफ एकेडेमिक ऑफिसर एन्थोनी लिटल, ऑस्ट्रेलिया के ग्लोबल सप्लाई चेन ग्रुप के प्रबंध निदेशक विवेक सूद, अविवा लाईफ इन्शुरेंस कंपनी इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ट्रेवर बुल, युरोपियन सर्विसेस फोरम के प्रबंध निदेशक पास्कल केर्नेस, स्पेंटा मल्टिमीडिया प्रा. लि. के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मानेक डावर के साथ सीएनबीसी-टीवी 18 की समूह संपादक (नागरी व्यवहार एवं रियल एस्टेट क्षेत्र) मनीषा नटराजन ने बातचीत की।

श्री गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना तकनीक पर आधारित क्षेत्रों की मदद से, भारतीय सेवा क्षेत्र में तेजी से वैश्विकीकरण शुरू है। भारत में उत्पादित सेवा दुनियाभर में बिक रही है, इसलिए विदेशी मुद्रा बड़े पैमाने में भारत में आ रही है। उन्होंने कहा कि कुश्राग्र बुद्धि और मशीन सीखने के कारण, सेवाओं में रोजगार निर्माण होगा। मूल्य श्रृंखला बढ़ाने पर विशेष जोर देने की जरूरत है।

श्री रास्किन्हा ने बताया कि वैश्विक उत्पादन निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 1.7 प्रतिशत है और सेवा निर्यात में 3.35 फीसदी है। सेवा अधिक व्यापार-अनुकूल बन रही है। लिहाजा उसमें अपनी भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए। भारतीय अर्थव्यवस्था पर अधिक जोर देते हुए सेवा क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।

ज़ारा इंगिलिझियन ने कहा कि भारत की अधिकांश सेवा तकनीकज्ञान से सक्षम हैं। सेवा क्षेत्र में नए शोधों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण है और डिजिटल व्यवहारों की बाधाओं को दूर करना होगा। कौशल उन्नति के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को सहभागिता बढ़ानी होनी होगी।

एन्थोनी लिटल ने कहा कि सर्वोत्तम शिक्षा देश की सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा भारतीय विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा का विकल्प मिलना चाहिए। भारतीय शिक्षा के माध्यम से सांस्कृतिक विविधता दुनिया के सामने लाई जानी चाहिए।

विवेक सूद ने कहा कि आईटी सेवा क्षेत्र में भारत अग्रणी देशों में शामिल है। परंतु आर्थिक एवं कानूनी सेवा क्षेत्र जैसी अन्य सेवाओं में भी खूब अवसर हैं, उस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खाद्य क्षेत्रों का मूल्यांकन करते हुए विकास खन्ना ने कहा पूरी दुनिया में भारतीय आतिथ्य का सम्मान किया जाता है। यह केवल होटल और रेस्तरां तक सीमित नहीं है, देश के अच्छे अस्पतालों की ओर भी विदेशी मरीजों की आमद बढ़ गई है।

ट्रेवर बुल ने कहा देश की बीमा सेवाओं में अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों को सीधे अवसर देने की आवश्यकता है। भारत के युवाओं, महत्वाकांक्षी और डिजिटल कुशल व्यक्तियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि नवोदित स्टार्टअप, छोटे और मध्यम उद्यमियों को उचित सलाह देने की व्यवस्था होनी चाहिए। अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) के लिए बड़े पैमाने पर निधि का प्रावधान करने की आवश्यकता है।

पास्कल केर्नेस के अनुसार कृत्रिम बुद्धि, आईटी और रोबोट भारतीय सेवा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। सेवा क्षेत्र के विकास में देश की 1.3 अरब आबादी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत के स्वास्थ्य, आईटी और मनोरंजन क्षेत्रों में कौशल उपलब्ध हैं । ईओडीबी पर बोलते हुए मानेक डावर ने उम्मीद जताई कि व्यवसाय स्नेही वातावरण निर्माण करने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों को प्रशासन द्वारा गति देनी चाहिए।