कांग्रेस की बैठक में नहीं पोहचे 12 विधायक

नई दिल्ली : कर्नाटक में सत्ता के लिए भाजपा और जेडीएस-कांग्रेस के बीच रस्साकशी शुरू हो गई है। तीनों पार्टियां बहुमत के लिए जरूरी 112 विधायक होने का दावा कर रही हैं। इस बहुमत को सिद्ध करने से पहले तीनो पार्टिया अपने-अपने विधायकों के साथ बैठक कर रही है। इसी बिच कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 12 कांग्रेसी विधायकों के न आने से शह-मात का खेल और दिलचस्प हो गया है।

इधर, जेडीएस की बैठक से भी दो विधायक राजा वेंकटप्पा नायक और वेंकट राव नाडागौड़ा नदारद हैं। हालांकि अगर ये विधायक टूटते हैं तो भी कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के पास बहुमत का आंकड़ा होगा।

कर्नाटक में विधायकों की जोड़-तोड़ के बीच कांग्रेस अपने सभी 78 विधायकों को ईगलटन रिसॉर्ट में ले जा रही है, ताक़ि कोई और पार्टी इनके संपर्क में न आए। अपने विधायकों को टूट से बचाने के लिए कांग्रेस की ये रणनीति है। ये वही रिसॉर्ट है जहां गुजरात में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस विधायकों को रखा गया था।

कर्नाटक में सरकार बनाने के दो फॉर्मूला

1) फॉर्मूला 1 कांग्रेस+जेडीएस+अन्य यानी (78+38+1=117)
– आंकड़े बहुमत से ज्यादा हैं। लेकिन यह चुनाव के बाद का गठबंधन है। ऐसे में राज्यपाल पर कोई संवैधानिक या नैतिक दबाव नहीं है कि इस गठबंधन को ही पहला मौका दें।

2) फाॅर्मूला 2 भाजपा+जुटाए विधायक यानी (104+8=112)
– भाजपा को कम से कम आठ विधायकों की जरूरत है। एेसे में कांग्रेस या जेडीएस से कम से कम आठ विधायक तोड़ने होंगे। सबसे बड़े दल के नाते राज्यपाल ने भाजपा को न्योता दिया तो उसे बहुमत जुटाने के लिए मोहलत मिल जाएगी।

– एक संभावना ऐसी भी हो सकती है: इन दो फॉर्मूलों के अलावा एक तीसरी स्थिति भी संभव है। न्योता मिलने के बाद भी भाजपा बहुमत साबित करने में नाकाम रही तो कांग्रेस- जेडीएस काे गैर भाजपा सरकार बनाने का मौका मिल सकता है।