कमला मिल कंपाउंड के मालिकों को मुंबई उच्च न्यायालय से मिली राहत

मुंबई : मुंबई उच्च न्यायालय ने मुंबई कमला मिल कंपाउंड के मालिकों को राहत दी है। 29 दिसंबर 2017 को कामला मिल कंपाउंड में लगी आग के मामले में रमेश गवानी और कमला मिल कंपाउंड के निदेशक रवि भंडारी को गिरफ्तार किया गया था जिन्हे अब हायकोर्ट ने जमानत दी है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उच्च न्यायालय ने तत्काल जमानत आवेदन पर सुनवाई पूरी की। न्यायमूर्ति व्ही. एल. अचलिया ने दोनों पक्षोंकी दलीले सुनने के बाद इसकी सुनवाई बुधवार को करने का निर्णय लिया था।

कमला मिल के मालिक रमेश गोवानी को कमला मिल में लगी आग का जिम्मेदार बताते हुए एमआरटीपी के तहत गिरफ्तार किया गया था। रमेश गोवानी और रवि भंडारी के खिलाफ एमआरटीपी अधिनियम का उल्लंघन करने, अवैध तरीके से काम करने, जैसे विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। लेकिन दोनों ने अपने अर्जी में दावा किया कि इस घटना से उनका कोई संबंध नहीं है।

जब यह घटना हुई तो हम वहां उपस्थित नहीं थे। वहां होने वाले काम से हमारा कोई संबंध नहीं है। इन दोनों जगहों को पांच साल के लिए किराये से दिया गया है। इस जगह पर चल रहा पब्ज-रेस्टॉरंट का लाइसेंस नगर पालिका ने दिया है। राज्य सरकार ने शराब के लिए लाइसेंस जारी किए हैं। मुंबई फायर ब्रिगेड द्वारा अग्नि सुरक्षा लाइसेंस जारी किया गया है। जिस कारन इस घटना से उनका कोई संबंध नहीं है ऐसा गोवानी और भंडारी ने कहा है।

सरकारी वकील के साथ इस घटना में जख्मी हुए सभी लोगो ने इस जमानत का विरोध किया है। उनका कहना है की इस घटना से उनका कोई संबंध नहीं है ऐसा कहने का कोई हक्क याचिका कर्ताओं को नहीं है। कमला मिल कंपाउंड के करीब उनके कार्यालय है फिर भी इस सन्दर्भ में उनको कोई जानकारी नहीं है ऐसा कहना साफ़ गलत है। इस हादसे में सुरक्षा के सभी नियमों को तोडा है। इस जगह के मालिक होने के नाते सुरक्षा का जिम्मा इन दोनों का भी बनता है ऐसा सरकारी वकील का कहना था।

बता दे कि, 29 दिसंबर की रात को कमला मिल कम्पाउंड में स्थित ‘वन अबव’ और ‘मोजेस ब्रिस्टो’ रेस्टोबार को लगी आग में 14 लोगो की मौत हुई थी और 30 से भी ज्यादा लोग इस हादसे में जख्मी हो गए थे।