हाईकोर्ट का आदेश ; अल्पसंख्यांक सीटों पर अंत में दे प्रवेश

नागपुर: अल्पसंख्यक स्कूलों में अल्पसंख्यक छात्रों के लिए आरक्षित सीटों को समर्पित कर उनके स्थान पर सामान्य प्रवर्ग से प्रवेश दिए जाने को चुनौती देते हुए स्त्री शिक्षण प्रसारक मंडल की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई. याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश भूषण धर्माधिकारी और न्यायाधीश हक ने केंद्रीय प्रवेश समिति को नोटिस जारी कर ऐसी सीटों पर अंत में प्रवेश सुनिश्चित करने के अंतरिम आदेश दिए. याचिकाकर्ता के अनुसार शहर में कुल 58 अल्पसंख्यकों की शालाएं हैं.

जहां 50 प्रतिशत अल्पसंख्यक छात्र, 25 प्रतिशत सामान्य वर्ग, 20 प्रतिशत इन हाउस प्रवर्ग और 5 प्रतिशत व्यवस्थापन कोटे से प्रवेश दिए जाते हैं. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. भानुदास कुलकर्णी ने पैरवी की.

जनहित के रूप में किया स्वीकार
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि शहर में 11वीं के प्रवेश केंद्रीय प्रवेश प्रक्रिया द्वारा किए जाते हैं, जिसमें अल्पसंख्यांक दर्जे की शालाओं की ओर से अल्पसंख्यक छात्रों के लिए आरक्षित 50 प्रतिशत सीटें प्रवेश समिति को समर्पित करते हैं, लेकिन उन स्थानों पर सामान्य प्रवर्ग से प्रवेश लिया जाता है. एक ओर अल्पसंख्यक वर्ग में रहकर अन्य लाभ लिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर 11वीं प्रवेश के लिए आरक्षित सीटों का समर्पण कर सामान्य प्रवर्ग से छात्रों को प्रवेश दिया जाता है, जबकि यह परम्परा गलत है.

इस तरह से सामान्य दर्जे की शालाओं का नुकसान होता है जिससे समर्पित की गईं सीटों पर सामान्य प्रवर्ग से प्रवेश नहीं देने का अनुरोध अदालत से किया गया. सुनवाई के बाद अदालत ने इसे जनहित के रूप में स्वीकृत कर शिक्षण संचालक, उपसंचालक और प्रवेश समिति को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह में जवाब दायर करने के आदेश दिए. साथ ही अन्य शालाओं में सामान्य प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रों की संख्या बची होने पर अल्पसंख्यक शालाओं द्वारा समर्पित सीटों पर प्रवेश देने के आदेश दिए.

राज्य भर में लागू होगा आदेश

विशेषत: संस्था द्वारा केवल महानगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली अल्पसंख्यक शालाओं को लेकर ही याचिका दायर की गई थी. लेकिन अदालत ने इसे जनहित के रूप में स्वीकार कर अंतरिम आदेश का पालन राज्य भर में करने के आदेश भी दिए. साथ ही सभी संबंधित प्राधिकरण को इसका पालन करने की हिदायत भी दी.