पशुपालकों को उच्च प्रजाति की गायें उपलब्ध कराएं जाएंगे – महादेव जानकर

मुंबई: महाराष्ट्र के पशुपालन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य व्यवसाय मंत्री महादेव जानकर ने कहा है कि देसी गायों और भैंसों की नस्ल में सुधार करने के काम को राज्य सरकार बहुत तेजी से कर रही है और आने वाले समय में राज्य में पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय से जुड़े किसानों को अधिक मात्रा में दूध देने वाली उच्च प्रजाति गाय की उपलब्ध कराई जाएगी।

‘राष्ट्रीय गोकुळ मिशन’ के तहत मंजूर की गई धनराशि से ताथवडे (तालुका मुलशी, जिला पुणे) में पशु पालन शाला (कैटल फार्म) परिसर का भूमिपूजन आज श्री जानकर के हाथों हुआ। इस अवसर पर अपने संबोधन में उन्होंने राज्य सरकार के फैसले की जानकारी दी। इस अवसर पर पूर्व विधायक शरद ढमाले, पशुपालन आयुक्त कांतिलाल उमाप, अतिरिक्त आयुक्त डी. एम. चव्हाण, ताथवडे फार्म के प्रबंधक श्री विधाते आदि उपस्थित थे।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत ताथवडे में कैटल फार्म में 600 पशुओं को पालने की क्षमता वाले गोशाला का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 2 करोड़ 46 लाख रुपये की धनराशि मंजूर की गई है। इस जगह अब 95 भैंसें का भी पालन होगा। पशुओं की ब्रीडिंग के बाद कुछ समय बाद अधिक पशु यहां पाले जा सकेंगे।सेना के गायों को भी इस गौशाला में हस्तांतरित करने का प्रस्ताव है। यह गौशाला बहुत ही आधुनिक तरीके से बनाई जाएगी और इसे पूरी तरह से एक तकनीकी पद्वति से विकसित किया जाएगा।

गौशाला के निर्माण के लिए पुणे स्थित सरकारी इंजीनियरिंग महाविद्यालय (सीईओपी)से तकनीकी सलाह लेकर गौशाला की रूपरेखा बनाई गई है। पशुओं को उनके स्थान पर ही चारा उपलब्ध कराने के लिए ट्रैक्टर से आधुनिक मशीन जोड़ी जा रही है। इस मशीन में हरा चारा, नरम चारा और पशु चारा को उचित मात्रा में मिलाकर देने की व्यवस्था है। इसके अलावा ट्रैक्टर चालित उपकरण का द्वारा ही पशु गोबर उठाया जाएगा। दूध दूहने के लिए अलग से कमरों की व्यवस्था को गई है और मशीन की सहायता से ही दूध निकाला जाएगा।

गायों और भैंसों को धोने के लिए स्प्रिंकलर यानी छिड़काव की व्यवस्था की जाएगी। पानी की आपूर्ति के लिए भी स्वचालित यंत्र की व्यवस्था तैयार की जाएगी। जानवरों को बांधने की बजाय उनके मुक्त संचरण पद्धति अपनाई जाएगी। मुफ्त संचार प्रणाली को अपनाया जाएगा। यहां निर्मित दूध अच्छी क्वालिटी का और सेहतमंद होगा और इसकी विक्री सीधे उपभोक्ताओं को की जाएगी। इसमें से खेत के रखरखाव में आनेवाले खर्च की आपुर्ति की योजना बनाई गई है।

ताथवडे क्षेत्र में पशुओं को संरक्षित करने के साथ ही उनकी वंशावली में सुधार के लिए अनुसंधान भी किए जाएंगे। गीर, साहिवाल या अधिक दूध देने वाली गायों के साथ ही खिलार, डांगी, देवणी आदि देशी गायों के वंशबेल में सुधार करने के लिए इनकी खरीद की जाएगी। इन गायों और भैंसों की वंशबेल में सुधार करने के लुई सरोगेसी और आईवीएफ इन आधुनिक तकनीकी का सहारा लिया जाएगा। ये जानकारी फार्म के व्यवस्थापक श्री विधाते ने दी।