डिप्लोमा इन बांस टेक्नोलोजी पाठ्यक्रम में शिक्षा के साथ-साथ स्वयंरोजगार के भी अवसर

पढ़ों जरा हटके...

मुंबई: बांस अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र की ओर से २ साल का डिप्लोमा इन बांस टेक्नोलोजी पाठ्यक्रम शुरू किया गया है और इसमें कम से कम दसवी उत्तीर्ण छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इस पाठ्यक्रम को महाराष्ट्र राज्य तकनीकी शिक्षा मंडल की मान्यता है। आप अंशकालीन नियमित २ साल के इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर एक अलग शिक्षा के क्षेत्र में क़दम रख सकते है। इसके अलावा यह डिप्लोमा करके स्वयंरोजगार की दिशा भी मिल सकती है। इस पाठ्यक्रम में अधिकतर प्रात्यक्षिक पर ज़ोर दिया गया है और इस केंद्र की ओर से रहने के लिए वसतिगृह की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही छात्रों को प्रतिमहा १५०० रुपए छात्रवृत्ति दी जाती है ।

इस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेनेवाले छात्र विविध बांस क्षेत्र को भेट दे सकेंगे। अब तक बल्लारपुर बांस डिपो, बांस उद्यान वडाली नर्सरी, अमरावती जैसे जगह पर छात्रों के भेट दौरे का आयोजन किया गया है। वहीं प्रस्तावित दौरे में अगरबत्ती प्रकल्प, बांस कंस्ट्रक्शन साईट, बांस केन डेवलपमेंट इन्स्टिट्यूट आगरतला, सभी बांस केंद्र, आय.आय.टी मुंबई शामिल है।

सर्टिफिकेट कोर्सेस

बांस अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र की ओर से सर्टिफिकेट कोर्स इन बांस कन्स्ट्रक्शन, सर्टिफिकेट कोर्स इन बांस मॅनेजमेंट (प्लानटेशन टु हार्वेस्टिंग) फॉर फार्मर्स, सर्टिफिकेट कोर्स इन बांस ट्रीटमेंट पाठ्यक्रम भी चलाए जाते है।

सामंजस्य करार

विदर्भ के चंद्रपुर , गड़चिरोली, भंडारा, गोंदिया और नागपुर जिले के वनों में बड़े पैमाने पर बांस मिलता है। मुख्यत: इन जिलों में मेंडेन्ड्रो कॅलामस स्ट्रिक्टस प्रजाति का बांस मिलता है। बांस के प्रत्येक भाग का उपयोग होता है। ग्रामीण जीवन में एवं व्यावसायिक दृष्टि से उद्योग में बांस को महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रीय पद्धति में बांस बुआई और उसके औद्योगिक उपयोग के प्रचार एवं प्रसार के लिए महाराष्ट्र सरकार ने चंद्रपुर जिले के चिचपल्ली में बांस अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की है।

राज्य में बांस उद्योग को गति देने एवं बांस वस्तुओं को विश्व स्तर पर मार्केट उपलब्ध होने के लिए टाटा ट्रस्ट और बांस अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के बीच सामंजस्य करार किया गया है। बांस कारागिर बांस का महत्तता को बढ़ाते है जिससे रोजगार के अवसर निर्माण होते है। पर्यावरणपुरक वस्तूंओं के उपयोग को बढ़ावा देने एवं उसे गति देने तथा प्रशिक्षण लेनेवाले छात्रों को शैक्षणिक स्तर पर मार्गदर्शन की आवश्यकता इन दोनों बातों को ध्यान में रखकर आय.आय.टी मुंबई और बांस अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, चिचपल्ली के बीच सामंजस्य करार किया गया है। इस संदर्भ में अधिक जानकारी केंद्र www.brtc.org.in की इस वेबसाइट पर उपलब्ध है।