मछली संवर्धन के लिए चांदा से बांदा योजना से निधि दी जाएगी – महादेव जानकर

मुंबई : राज्य में मछली व्यवसाय के असीमित अवसर हैं । युवकों को इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ लेते हुए अपनी प्रगति करनी चाहिए ।

चांदा से बांदा योजना के अंतर्गत झींगा , जिताडा तथा केकड़ा संवर्धन (क्रॅब कल्चर) आदि को प्रोत्साहन देने के लिए निधि की कमी नहीं होने दी जाएगी । यह बात पशुसंवर्धन, दुग्ध विकास व मत्स्य व्यवसाय मंत्री महादेव जानकर तथा गृहराज्य मंत्री दीपक केसरकर झन कही ।

चांदा ते बांदा योजना के अंतर्गत चंद्रपुर तथा सिंधुदुर्ग जिलों में मत्स्य व्यसाय को गति देने के लिए चर्चा करने के उद्देश्य से श्री जानकर की अध्यक्षता में तथा श्री. केसरकर की उपस्थिति में बैठक आयोजित की गई थी । इसी अवसर पर ये निर्देश दिये गए ।

सरकार इस उद्योग को गति और प्रोत्साहन देने के लिए सदैव ही प्रयत्नशील है ऐसा कहते हुए इस बैठक में व्हेनामी झींगा बीज उत्पादन केंद्र (हॅचरी), केकडा हॅचरीज, जिताडा मछली हॅचरीज व संवर्धन, खारे व मीठे पानी में पिंजरा पद्धति से मछली पालन , मछली पकड़ने की जेट्टी का आधुनिकीकरण आदि बातों की चर्चा की गई । राज्य में बड़े पैमाने पर जल क्षेत्र उपलब्ध होने के कारण समुद्र किनारों पर मछली पालन के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध है । झींगा , केकड़ा , जिताडा मछली पालन तथा पिंजरा पद्धति से मछली संवर्धन के लिए उपलब्ध जगह की तकनीकी दृष्टि से व्यावहारिकता देखकर इन बातों का प्रस्ताव तत्काल भेजा जाए , ऐसे निर्देश श्री. जानकर ने इस अवसर पर दिये ।

श्री केसरकर ने इस अवसर पर कहा कि चांदा से बांदा योजना कोकण तथा विदर्भ के जिलों के विकास के लिए महत्वाकांक्षी योजना है । सर्व सामान्य के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के लिए विभिन्न परियोजनाएं लागू की जा रही हैं । सर्वसामान्य को स्थायी रोजगार देने के लिए मछली संवर्धन की योजना उपयुक्त है । इसके लिए पर्याप्त निधि दी जाएगी , श्री केसरकर ने कहा ।

इस अवसर पर विभाग के सचिव किरण कुरुंदकर, मत्स्य व्यवसाय आयुक्त अरुण विधळे, मँग्रूव्ह सेल के प्रमुख तथा अतिरिक्त मुख्य वनसंरक्षक एन. वासुदेवन, समुद्री उत्पादन निर्यात विकास प्राधिकरण के (MPEDA)उपसंचालक श्री. नाईक,मत्स्य व्यवसाय उपसचिव विजय चौधरी, सहआयुक्त राजेंद्र जाधव, बाळासाहेब सावंत कोकण कृषि विश्वविद्यालय के प्रकाश शिनगारे आदि उपस्थित थे ।