BMC के बिल्डिंग प्रपोज़ल विभाग से चोरी हुई फाइल, मुंबई पुलिस ने अब तक नहीं दर्ज की FIR

मुंबई: महानगर पालिका के बिल्डिंग प्रपोज़ल डिपार्टमेंट से फाइल चोरी होने के मामले में अंटाप हिल पुलिस थाने ने एक साल बीत जाने के बाद भी मामले में टालमटाल हो रही है यही वजह है कि अब तक FIR नहीं दर्ज हुई। पिछले साल बिल्डिंग प्रपोज़ल डिपार्टमेंट ने अंटापहिल पुलिस थाने को पत्र लिख कर यह जानकारी दी थी की उनके विभाग से कई सारी फाइलें गायब हो गई हैं इस पर FIR दर्ज की जाए । BMC के मुताबिक The Maharashtra Public Record Act 2005 तहेत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। लेकिन साल भर बीत जाने के बाद भी पुलिस ने इस मामले में मामला नहीं दर्ज किया गया।

हमने इस बारे में ज़ोनल डीसीपी एन अंबिका से बात की तो उन्होंने कहा कि FIR ऐसे नहीं होता BMC की ओर से खुद अधिकारियों को जाना पड़ता है इस तरह के मामले दर्ज करवाने के लिए। जबकि Bombay Leaks के पास उस आवेदन की कापी मौजूद है जो कि बीएमसी के बिल्डिंग प्रपोज़ल डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने एक साल पहले खुद जाकर आवेदन दिया था।

दर असल बिल्डिंग प्रपोज़ल डिपार्टमेंट से बिल्डिर जान बूझ कर फाइल गायब कर देते हैं और उसके साथ खुद बीएमसी के अधिकारी इसमें शामिल रहते हैं। अपने पत्र में BMC ने इस बात का उल्लेख किया है कि फाइल गायब करने के बाद बिल्डर कंप्युटर से स्कैन कॉपी प्रिंट कर के उसमे छेड़छाड़ कर के उसे फिर से कंप्युटर पर अपलोड करवा कर उसे पुराने रिकार्ड की तरह दर्ज करवाते हैं।

क्या होता है बिल्डिंग प्रपोज़ल डिपार्टमेंट
BMC का सब से अहम और संवेदनशील विभाग होता है जहां मुंबई भर की बिल्डिंगों और जगहों के नक्शे होते हैं जिसके तहेत यह पता चलता है कि कौन सी बिल्डिंग और जगह का क्षेत्रफल कितना है कितने माले की है। पुरानी बिल्डिंगें जो कि 2 से 3 माले की होती हैं उन्हें अवैध रूप से 6 से 7 माले तक बनाई जाती हैं और उसके लिए उसके कागज़ात जो कि बिल्डिंग प्रपोज़ल डिपार्टमेंट से गायब कर के उसमें छेड़छाड़ करते हैं और उसे कंप्युटर पर अपलोड कर देते हैं इस तरह से पुराना रिकार्ड गायब होने के बाद नए रिकार्ड जिसमें छेड़छाड़ की जाती है उसे रिकार्ड़ पर रखा जाता है। इस सारे प्रकरण को कानूनी रूप देन के लिए BMC पुलिस और बिल्डर आपस में सांठगांठ कर के पहले वह फाइलें गायब होने की शिकायत पुलिस थाने में कर के खानापुरी करते हैं जिससे BMC पर कोई आरोप न लगे। और उस पूरे मामले पर कोई कार्रवाई न करते हुए उसे ठंडे बस्ते में डाल देते हैं इस तरह से पूरा मामला दबा दिया जाता है। इस मामले में अगर पुलिस के आला अधिकारी यदि सही तरह से जांच पड़ताल करें तो बीएमसी बिल्डर केज़रिए करोड़ों अरबों रूपए के घपले करने वाले बिल्डर और BMC अधिकारी बेनाकाब होंगे।