महाराष्ट्र की विश्व स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र बनने की क्षमता- डॉ. प्रदीप कुमार व्यास

मॉर्डन हेल्थकेयर : मेडीकल वैल्यू ट्रैवल चर्चासत्र

मुंबई : पर्याप्त संख्या में चिकित्सा अधिकारी तथा कर्मचारी और उनकी उत्तम स्तर की कार्यक्षमता, संसाधन ,कार्य क्षमता वाला देश भारत भविष्य में विश्व स्तर का रोगों का निदान करने वाला देश बन जाएगा । शहर से ग्रामीण भागों में स्वास्थ्य सेवा जोड़ने के लिए तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल किया जा रहा है । सभी अस्पतालों में जानकारी एक ही मंच पर देश तथा विदेश के नागरिकों को मिल सके इसके ले प्रयत्न शुरू हैं , ऐसी जानकारी सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग प्रधान सचिव डॉ. प्रदीप कुमार व्यास ने दी ।

सेवा क्षेत्र संबंधी वैश्विक प्रदर्शनी में आधुनिक स्वास्थ्य निगा- मेडिकल वैल्यू ट्रेवल इस विषय पर चर्चासत्र का आयोजन किया गया था । इस अवसर पर डाॅ व्यास बोल रहे थे ।

डॉ. व्यास ने कहा कि विदेश से आने वाले रोगियों की बीमारियों के निदान कौन से चिकित्सालय में हो , उसकी चिकित्सकीय शुल्क कितनी होगी , इन सब बातों की पूरी जानकारी एक ही जगह पर मिल सके इसके लिए आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल किया जाएगा । राज्य में अस्पताल अधिक क्षमतापूर्वक काम कर सकेंगे इसके लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा ।

बहुत सी बीमारियों का निदान करने के लिए विभिन्न देशों के लोग भारत आते हैं। भारत में एलोपैथी, होम्योपैथी, यूनानी इलाज के केंद्र हैं । महाराष्ट्र में 22 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं। 25 निजी कॉलेज हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल हैं।

सरकार द्वारा विभिन्न बीमा योजनाएं और स्वस्थ योजनाएं लागू की जा रही हैं। बीमा योजना के तहत 1.5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की संख्या है । बाल मृत्यु दर कम हो रही है। सरकार जनजातीय और अल्पसंख्यकों के लिए भी योजनाएं लागू कर रही है। डॉ व्यास ने कहा कि, केवल कुछ साल पहले कुछ बड़े रोगों का इलाज विदेशों में ही संभव था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब महाराष्ट्र में ऐसे रोगों के निदान के लिए हर तरह की सुविधाएँ हैं । सक्षम कुशल चिकित्सा अधिकारी भी हैं । इससे महाराष्ट्र विश्व स्तरीय स्वास्थ्य केंद्र बन जाएगा ।

चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. प्रवीण शिनगारे ने कहा कि हर साल 60 हजार डॉक्टर तैयार हो रहे हैं। राज्य की पैरामेडिकल काउंसिल के साथ प्रत्येक डॉक्टर, नर्स, प्रयोगशाला तकनीशियनों का नामांकन करना अनिवार्य है । विदेशी मरीजों के साथ कोई अप्रिय घटना न घटे इसके लिए अनेक नियम बंधनकारक हैं ।

पद्मश्री देशपांडे ने कहा कि भारत में सबसे अच्छी चिकित्सा सुविधाओं के साथ विशेषज्ञ सर्जन उपलब्ध हैं । भारत में बीमारी का निदान अन्य देशों की तुलना में कम दरों पर होता है। इसके अलावा, कम समय में इलाज किया जाता है। लगभग 4 मिलियन रोगी बीमारियों के इलाज के लिए भारत का चयन करते हैं।

कार्यक्रम में आयुर्वेद अस्पताल के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव वासुदेवन, ई कौशल्य विकास विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ई. रविंद्रन, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. अनूप वाधवान सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधि इस अवसर पर उपस्थित थे।